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प्रभु की प्रार्थना

प्रभु की प्रार्थना

जब उसके चेलों ने उससे प्रार्थना करना सिखाने को कहा, तो यीशु ने उन्हें यह प्रार्थना दी। यह छोटी है, और सब कुछ इसमें समा जाता है।

संक्षेप में

प्रभु की प्रार्थना वह प्रार्थना है जो यीशु ने अपने चेलों को मत्ती 6:9-13 में सिखाई। यह परमेश्वर को पिता मानकर उसकी आराधना से शुरू होती है, उसके राज्य के आने और उसकी इच्छा के पूरी होने की विनती करती है, फिर दिन भर की रोटी, क्षमा, और बचाव माँगती है। यह हर प्रार्थना का आदर्श है।

पूरी प्रार्थना

“हे हमारे पिता, तू जो स्वर्ग में है; तेरा नाम पवित्र माना जाए।

तेरा राज्य आए; तेरी इच्छा जैसी स्वर्ग में पूरी होती है, वैसे पृथ्वी पर भी हो।

हमारी दिन भर की रोटी आज हमें दे।

और जिस प्रकार हम ने अपने अपराधियों को क्षमा किया है, वैसे ही तू भी हमारे अपराधों को क्षमा कर।

और हमें परीक्षा में न ला, परन्तु बुराई से बचा;

क्योंकि राज्य और पराक्रम और महिमा सदा तेरे ही हैं।” आमीन।

मत्ती 6:9-13, हिन्दी पवित्र बाइबिल (HHBD)।

इसका अर्थ, पंक्ति दर पंक्ति

"हे हमारे पिता" हमें याद दिलाता है कि हम एक ऐसे परमेश्वर से प्रार्थना करते हैं जो निकट है, दूर नहीं, और कि हम कभी अकेले प्रार्थना नहीं करते: वह "हमारा" पिता है, पूरे परिवार का।

"तेरा नाम पवित्र माना जाए, तेरा राज्य आए" हमारी ज़रूरतों से पहले परमेश्वर और उसकी इच्छा को रखता है। यह भरोसे का एक कार्य है।

"हमारी दिन भर की रोटी आज हमें दे" हमें सिखाता है कि हम एक-एक दिन करके परमेश्वर पर निर्भर रहें, उतने के लिये जितना आज की आवश्यकता है।

"हमारे अपराध क्षमा कर, जैसे हम ने भी क्षमा किया" उस क्षमा को, जो हम पाते हैं, उस क्षमा से जोड़ता है जो हम देते हैं। पाई हुई क्षमा ही हमें क्षमा करने योग्य बनाती है।

"बुराई से बचा" यह जानते हुए कि हम अपने बल पर पर्याप्त नहीं, बचाव के लिये एक नम्र विनती है।

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